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फैंटेसी क्रिकेट में ऑलराउंडर का स्लॉट सबसे फायदे का सौदा है, और सबसे आसानी से बर्बाद भी यही होता है। टीम की एक जगह से पॉइंट बनाने के दो मौके मिलते हैं, बल्ले से भी और गेंद से भी। लेकिन टीम स्क्रीन पर लगा लेबल यह बताता है कि खिलाड़ी क्या कर सकता है, यह नहीं कि इस महीने उसका कैप्टन उससे क्या करवा रहा है। सारा हुनर इन दोनों में फर्क पहचानने का है।
दो मौके एक से बेहतर क्यों
गेंदें गिनिए। T20 में दोनों पारियों को मिलाकर 240 वैध गेंदें होती हैं। 25 गेंदें खेलने वाला ओपनर मैच के करीब दसवें हिस्से में सीधे शामिल रहता है। अपने पूरे चार ओवर, यानी 24 गेंदें डालने वाला गेंदबाज़ भी लगभग इतने ही हिस्से में। जो खिलाड़ी चौथे नंबर पर 18 गेंदें खेलता है और चार ओवर भी डालता है, वह 42 गेंदों में शामिल रहता है, यानी मैच के छठे हिस्से से भी ज़्यादा में।
| खिलाड़ी | शामिल गेंदें | मैच में हिस्सा |
|---|---|---|
| 25 गेंदें खेलने वाला ओपनर | 25 | 10.4% |
| गेंदबाज़, चार ओवर | 24 | 10.0% |
| ऑलराउंडर: 18 गेंदें खेलीं, चार ओवर डाले | 42 | 17.5% |
मैच में ज़्यादा भागीदारी का मतलब है कि सबसे खराब दिन में भी स्कोर बेहतर रहता है और सबसे अच्छे दिन में भी। बल्ले से नाकाम होने के बाद भी ऑलराउंडर के पास दिन संभालने के लिए चार ओवर बचे रहते हैं। स्पेशलिस्ट यह नहीं दे सकता।
तीन तरह के ऑलराउंडर
| प्रकार | बल्ले से | गेंद से | फैंटेसी में मतलब |
|---|---|---|---|
| असली | टॉप छह | कोटे के ज़्यादातर या पूरे ओवर | यही कीमत के लायक है |
| बैटिंग ऑलराउंडर | टॉप पांच | एक-दो ओवर, किसी दिन एक भी नहीं | बल्लेबाज़ है, उसी तरह परखें |
| बॉलिंग ऑलराउंडर | सात या आठ | पूरा कोटा | गेंदबाज़, साथ में कुछ बोनस रन |
पांच मैच की कसौटी
किसी भी ऑलराउंडर को चुनने से पहले इस फॉर्मेट में उसके पिछले पांच मैच देखें और दो आंकड़े लिख लें: वह आम तौर पर किस नंबर पर बल्लेबाज़ी करता है, और हर मैच में उसने कितने ओवर डाले।
- T20: छठे नंबर या उससे ऊपर बल्लेबाज़ी और हर मैच में तीन या ज़्यादा ओवर। यही असली ऑलराउंडर है।
- ODI: छठे नंबर या उससे ऊपर बल्लेबाज़ी और हर मैच में सात या ज़्यादा ओवर।
- सिर्फ एक हिस्से में खरा उतरा? उसे ऐसा स्पेशलिस्ट मानें जिस पर बस ऑलराउंडर का लेबल लगा है, और खुद से पूछें कि क्या इस स्लॉट के लिए वह सबसे अच्छा उपलब्ध स्पेशलिस्ट है।
ये सीमाएं मोटे अंदाज़े के नियम हैं; असली बात यह आदत है। जिस खिलाड़ी को ऑलराउंडर लिखा गया है, पर जिसने पांच T20 में कुल छह ओवर डाले हैं, वह मिडिल ऑर्डर का बल्लेबाज़ है, और शायद वह भी नहीं जो आपके पास सबसे अच्छा विकल्प हो।
किन बातों से आकलन बदलता है
- फॉर्मेट। ODI में दस ओवर और लंबी पारी मिलती है, इसलिए स्पेशलिस्ट पर असली ऑलराउंडर की बढ़त और बड़ी हो जाती है। T20 में बाकी सबकी तरह उसकी गेंदबाज़ी भी 24 गेंदों तक सीमित है।
- पिच। सूखी, टर्न लेती पिच पर स्पिन गेंदबाज़ी करने वाला ऑलराउंडर अपना पूरा कोटा डालेगा। छोटी बाउंड्री वाली सपाट पिच पर कैप्टन शायद उससे गेंदबाज़ी ही न कराए।
- टीम का संतुलन। जिस टीम में पांच मुख्य गेंदबाज़ हों, वह ऑलराउंडर को छठे विकल्प की तरह इस्तेमाल करती है। जिसमें चार हों, उसे हर मैच में उसकी ज़रूरत पड़ती है।
- पहले बल्लेबाज़ी या बाद में। छोटे लक्ष्य का पीछा कर रही टीम में निचले क्रम के ऑलराउंडर की बल्लेबाज़ी की बारी शायद आए ही नहीं।
कितने चुनें
कम से कम और ज़्यादा से ज़्यादा कितने लेने हैं, यह टीम स्क्रीन तय करती है। इन सीमाओं के भीतर उतने ही चुनें जितने कसौटी पर खरे उतरें, उससे ज़्यादा नहीं। दो असली ऑलराउंडर चार लेबल वालों से ज़्यादा कीमती हैं। अगर सिर्फ एक खरा उतरे, तो बाकी जगहें ऐसे स्पेशलिस्ट से भरें जिनका काम पक्का हो: कोई ओपनर, कोई डेथ ओवर गेंदबाज़।
एक उदाहरण से तुलना
आज रात के T20 के लिए तीन खिलाड़ी ऑलराउंडर के तौर पर लिस्टेड हैं।
| खिलाड़ी | बल्लेबाज़ी | प्रति मैच ओवर, पिछले पांच | फैसला |
|---|---|---|---|
| A | पांचवां नंबर | 3.6 | असली। पहले ऑलराउंडर स्लॉट के लिए |
| B | तीसरा नंबर | 0.8 | बल्लेबाज़। तभी चुनें जब टॉप ऑर्डर के बाकी विकल्पों से बेहतर हो |
| C | आठवां नंबर | 4.0 | गेंदबाज़। तभी चुनें जब बाकी गेंदबाज़ों से बेहतर हो |
छोटे कॉन्टेस्ट में A लगभग अपने-आप चुना जाने वाला खिलाड़ी है और कैप्टन के लिए भी ठोस विकल्प, क्योंकि वह बहुत कम ही खाली हाथ लौटता है। B और C का मुकाबला स्पेशलिस्ट से है, A से नहीं। मेगा कॉन्टेस्ट में यह सोचना फायदेमंद है कि और किस-किसने ध्यान दिया है कि C डेथ ओवर में गेंदबाज़ी करता है: जिस बॉलिंग ऑलराउंडर को कम टीमों ने लिया हो, वह काम का डिफरेंशियल पिक बन सकता है।
ऑलराउंडर और कैप्टनसी
मैच में सबसे पक्का न्यूनतम स्कोर असली ऑलराउंडर का होता है, यानी बुरे दिन भी वह कुछ न कुछ दे जाता है, और यह छोटे कॉन्टेस्ट के लिए सही है। पर सबसे बड़े स्कोर की गुंजाइश हमेशा उसी के साथ नहीं होती: शतक बनाने वाला टॉप ऑर्डर बल्लेबाज़ आम तौर पर उससे ज़्यादा पॉइंट ले जाएगा। Drem के अंदर Points System पेज बताता है कि रन और विकेट को कितना वज़न मिलता है, और यही संतुलन तय करता है कि आप किस तरफ कितना झुकें।
आम गलतियां
- पिछले सीज़न के रोल के आधार पर चुनना। कैप्टन अपनी योजनाएं बदलते रहते हैं, और हाल के पांच मैच किसी की साख से ज़्यादा भारी पड़ते हैं।
- कभी-कभार डाले गए एक ओवर को गेंदबाज़ी मान लेना। एक ओवर में छह गेंदें होती हैं और विकेट शायद ही मिलता है।
- टीम स्क्रीन इजाज़त देती है, सिर्फ इसलिए ऑलराउंडर के सारे स्लॉट भर देना।
- टॉस को भूल जाना: जो टीम छोटा लक्ष्य जल्दी हासिल कर ले, उसे शायद सातवें नंबर के बल्लेबाज़ की ज़रूरत ही न पड़े।
चेकलिस्ट
- घोषित प्लेइंग इलेवन में है।
- इस फॉर्मेट के लिए कसौटी पर खरा उतरता है।
- पिच उसकी गेंदबाज़ी के मिज़ाज के मुताबिक है।
- उसकी टीम को उसके ओवरों की ज़रूरत पड़ने की संभावना है।
- अगर वह कसौटी पर आधा ही खरा उतरता है, तो स्पेशलिस्ट से उसकी तुलना कर ली है।
पूरी इलेवन में ऑलराउंडर कहां फिट होते हैं, यह जानने के लिए संतुलित इलेवन बनाना देखें। इस लेख के पीछे गिनती का जो तरीका है, वह फैंटेसी क्रिकेट रणनीति पेज पर है।


